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एक छोटे फाइनेंस ब्रांच ऑफिस में एक बुज़ुर्ग चौकीदार काका ने नियम और ईमानदारी की ऐसी मिसाल दी कि खुद नया जॉन हेड भी उनका कायल हो गया। पढ़िए यह प्रेरणादायक हिंदी कहानी। Hindi kahani।Chhoti kahani। Inspiration Story in Hindi।प्रेरणादायक हिंदी कहानियाँ।शिक्षाप्रद कहानियाँ ।Hindi stories।Nayi Kahaniya।

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सुबह के आठ बजकर तीस मिनट हुए थे। एक फाइनेंस ब्रांच के ऑफिस के बाहर एक बुज़ुर्ग प्यून – गोपाल काका रोज़ की तरह अपनी डेली प्रक्रिया कर रहे थे। उन्होंने गेट खोला, दरवाज़े के बाहर की कुर्सी पर बैठकर अख़बार खोला और चाय की चुस्की लेने लगे।

ऑफिस का टाइम रोज़ की तरह सुबह 10 बजे का था, लेकिन गोपाल काका रोज़ जल्दी आ जाया करते थे। सर्दी मे अपना स्वेटर और टोपा लगाकर वो तैयार रहते थे, सर्दी से निपटने के लिए।


अचानक कोई आया।

करीब 9 बजे, एक बड़ी कार आकर रुकी। उससे एक सूटेड-बूटेड व्यक्ति उतरा, मोबाइल हाथ में, चेहरे पर आत्मविश्वास।
वो सीधे ऑफिस के दरवाज़े की ओर बढ़ा।

गोपाल काका ने तुरंत उठकर कहा —
“साहब, ऑफिस 10 बजे खुलेगा। अभी आप अंदर नहीं जा सकते।”

वो आदमी थोड़ा हैरान हुआ, फिर बोला —
“मैं इस जोन का नया हेड हूँ। आज पहली बार इस ब्रांच पर आया हूँ।”

काका ने विनम्रता से कहा —
“साहब, मुझे पता नहीं आप कौन हैं। लेकिन जब तक पुराने साहब या मैनेजर नहीं आते, कोई भी अंदर नहीं जा सकता। ये नियम है।”

वो आदमी थोड़ा झुंझलाया —
“आप मुझे जानते नहीं है मे क्या बोल रहा हूँ, किस ने रखा आपको यहाँ मुझे अंदर जाना है आप रोकोगे मुझे ”


काका भी अपनी बात पर अडिग रहे।

उनका गुस्सा देख कर काका बोले 
“साहब, आपके चिल्लाने और गुस्सा होने से कुछ फर्क नहीं पड़ेगा मे आपको नहीं जानता बस आप अंदर नहीं जा सकते।
अगर आप साहब है तों मुझे किसी इस ऑफिस के साहब से बात करा दीजिये वो कहेंगे तों मे जाने दूंगा।”

काका के तेवर देख कर साहब ने अपने सुर निचे किये -
“कम से कम मुझे अंदर जाने दो, मेरा फोन डिस्चार्ज है। अंदर जाकर चार्ज कर लूँ और  फिर मे तुम्हारी बात करवा दूंगा ।”

काका ने धीरे से कहा —
“माफ कीजिए साहब, पर नियम के आगे मैं कुछ नहीं कर सकता। आप बाहर ही बैठ जाइए।”

आखिर कार काका के आगे उनकी ना चली 

करीब एक घंटा वो साहब बाहर ही बैठे रहे।10 बजे ऑफिस के बाकी स्टाफ आए, और थोड़ी देर बाद ब्रांच मैनेजर वहाँ पहुँचे।
उन्होंने बाहर बैठे उस व्यक्ति को देखा तो हैरान रह गए।

“सर! आप बाहर क्यों बैठे हैं? हमें बताया नहीं गया कि आप आ रहे हैं अरे काका आपने साहब को अंदर क्यों नहीं बैठाया !”

अब काका को एहसास हुआ कि ये तो सच में नए ब्रांच हेड हैं।
वो तुरंत खड़े होकर बोले —
“माफ कीजिएगा साहब, मैं आपको नहीं पहचानता था ।”



अब काका पर साहब को गुस्सा नहीं आया वो मुस्कराए —

“नहीं काका, आपको माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं है।आपने जो किया, वो बिल्कुल सही किया। अगर आप जैसे लोग नियम न मानें, तो कोई भी ईमानदार व्यवस्था टिक नहीं पाएगी। पहले मुझे लगा था की इतने बुजुर्ग को क्यों इस तरह का काम दिया गया है लेकिन अब मे समझा की आप अपने काम के लिए कितने ईमानदार है ”


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