नई शादी, नया कमरा और मच्छरों की बारात।Hindi kahani। Romantic kahani। Comedy story।Hindi story। हिन्दी कहानी।मजेदार हिन्दी स्टोरी।



नई शादी की पहली रात कैसे मच्छरों की वजह से मजेदार बन गई, पढ़िए पति-पत्नी और मच्छरों के बीच हुई सबसे फनी सुहागरात की हल्की-फुल्की हिंदी कहानी



नई शादी, नया कमरा और मच्छरों की बारात।Hindi kahani। Romantic kahani। Comedy story।Hindi story। हिन्दी कहानी।मजेदार हिन्दी स्टोरी।


मेरी नई-नई शादी हुई थी। अरेंज मैरिज थी, लेकिन नीरज मुझे शुरू से ही अच्छे लगे थे—शांत, समझदार और व्यवहार में बहुत सरल। शादी गाँव में हुई थी, क्योंकि यही उनके परिवार की इच्छा थी। गाँव का माहौल अलग ही होता है—हर कमरे में हलचल, आँगन में टेंट, रसोई में पकवानों की खुशबू और रिश्तेदारों की भीड़।

शादी बहुत धूमधाम से हुई और मेरे मायके वाले विदाई के बाद वापस चले गए। मेरे ससुराल वाले नीरज और मे भी तुरंत निकलने वाले थे लेकिन अगले दिन एक परिचित ने हमें दावत पर बुला लिया जिस कारण रुकना पड़ा.

रात को मुझे और नीरज को एक कमरा दिया गया, जो हल्की रोशनी, फूलों और सुंदर साज-सज्जा से सजा था। दिल में हल्का-सा संकोच, थोड़ा उत्साह और घर भर में फैली नई दुल्हन वाली नजरें… सब कुछ बिल्कुल नया था।

नीरज कमरे में आए और हम दोनों बातें करने लगे। पहली रात होने के कारण दोनों में ही झिझक थी, लेकिन धीरे-धीरे हम हँसते-बोलते खुलते गए।
कब दो घंटे बीत गए, हमें पता ही नहीं चला। घड़ी में रात के 12 बज रहे थे।

मैं बाथरूम जाने के लिए उठी। जैसे ही दरवाज़ा खोला—एक झटके में जैसे मेरे सामने कोई काला बादल दौड़ता हुआ आया।

पूरा झुण्ड…
मच्छरों का।

बाथरूम की खिड़की खुली थी और मच्छरों ने जैसे हमारे कमरे को अपनी रिहाइश बना लिया था।
पलक झपकते ही दर्जनों मच्छर कमरे में आ गए।

मैं चीखी—
“नीरज! इतने सारे मच्छर? ये कैसे आ गए!”

नीरज ने बाथरूम का दरवाज़ा बंद किया, पर तब तक देर हो चुकी थी।

हमने लाइट बंद की—
तो काटने लगे।
लाइट चालू की—
तो सिर के ऊपर घूमने लगे।

मैंने झुंझलाकर कहा,
“पहली रात यही होना था? बाहर से कुछ ले तो आओ!”

नीरज भी परेशान हो गए,
“सब सो चुके हैं… बाहर कैसे जाऊँ? और वैसे भी मुझे क्या पता था कि कमरे में मच्छरों की पूरी फौज इंतजार कर रही है!”

मैं थोड़ा रूठ गई,
“सुहागरात का इंतजाम अच्छा किया है आपने…”

वो मुझे मनाने आए।
हम दोनों हँस ही रहे थे कि तभी एक मोटा-सा, खून पीकर लाल हुआ मच्छर उनके गाल पर बैठ गया।

और मैंने धप्प!
सीधा गाल पर थप्पड़ मार दिया।

नीरज सदमे में—
“ये क्या था!”

मैं शर्माते हुए बोली,
“मच्छर था… बहुत बड़ा था… लगा खून की बोतल पी गया है!”

वो पहले चुप रहे, फिर हँस पड़े,
“पहली रात का पहला गिफ्ट—एक थप्पड़!”

अब स्थिति इतनी बन चुकी थी कि रोमांटिक माहौल की जगह कॉमिक सीन बन गया था।
आखिर में हम दोनों ने बड़े-बड़े कंबल सिर तक ढाँप लिए और दो अलग-अलग कोनों पर सोने की कोशिश की।

सुबह नींद तो क्या आई, पर 6 बजे उठकर मैं तैयार हुई और किचन में गई। वहाँ कई महिलाएँ थीं और सबकी निगाहें मेरे चेहरे और गर्दन पर टिकी थीं।
मेरी ननद धीरे से मेरे पास आई और फुसफुसाकर बोली—

“भाभी… ये निशान... ढाक लो दिख रहे है !”

मैं हैरान होकर बोली,
“अरे ये सब मच्छरों ने काटा है!”

ननद ठहाका मारकर हँस पड़ी—
“पर ये बात कौन मानेगा, भाभी? भैया के भी गाल लाल हैं।..।”

मैंने शर्म से चेहरा छुपा लिया।

थोड़ी देर बाद नीरज आए, उनके गाल पर भी चार-छह निशान थे।
हमने एक-दूसरे की तरफ देखा और हँस पड़े।

नीरज धीरे से बोले,
“कम से कम एक बात तो है—हमारी पहली रात यादगार बन गई। बस वजह गलत है।”

मैंने कहा,
“मच्छरों ने हमें यूँ ही बदनाम कर दिया”

और वाकई, उस दिन के बाद से यह किस्सा हर शादी, हर मौके पर मज़ाक में उठता रहता है।
पर मेरे और नीरज के लिए यह हमारी पहली रात की सबसे प्यारी, सबसे मासूम याद बन गई—जहाँ रोमांस कम और हंसी ज़्यादा थी।



यह कहानी केवल मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी गई है। इसमें दिखाए गए सभी पात्र, घटनाएँ और परिस्थितियाँ काल्पनिक हैं। किसी भी व्यक्ति, परिवार या जगह से कोई समानता मात्र संयोग होगी। पाठकों से अनुरोध है कि कहानी को मनोरंजन की दृष्टि से ही पढ़ें।


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